
सुन्दर शीतल सुरमय सुखकर,
मृदुल मनोहर मणिमय मधुकर,
कोमल कमल कांतिमय लोचन,
हरित हिरनी सम् काया कंचन.
अश्रुत अद्भुत अतुल अनिंदनिय,
सरस सुमधुर सकल स्नेहमय,
ललित लालमय अधर अकिंचन,
गर्वित ग्रीवा, सुधा सम् गुंजन.
निर्मल निर्विकार, प्रफ़ुल्लित पल्लव,
आद्र अधर कोकिल कि करलव,
शुभ्र श्याम सन् स्नेह स्वरूपा,
विभुति विप्र वाला, बड़ी विदुषा.
चंचल चपल चराचर चर्चित,
मुदित मुखर मीन मर्यादित,
अटल अडिग अविचल सती सीता,
रौद्र रूप रमणी गुण गीता.
बरित् बर्णित बस ब्यास बखाना,
पंकज पथिक प्रित क्या जाना,
स्विकार स्नेह सम् सुंदर वाणी,
मनुहारि मृदु मगर अभिमानी.

2 comments:
ati sunder...
itne kathin sabdo to itni saadgi se dhaal kar aapne kavitha ke saundarya to aur badha diya hai.....
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