Tuesday, November 27, 2007

जीवित सपने!...

यह सच है कि ये सपना था,
देखा जो जीवन मे मैने कभी,
पर सपनो का भी होता है जीवन,
जीवित है वो सपने आज अभी.

टूटा एक महल है सपनो का,
बना था जो सपनो मे ही कभी,
सुन्दर था जो स्वर्ग के महलो से,
जीवित है वो सपने आज अभी.

था वह सपना या स्नेह मेरा,
सच समझ ना पाया अब तक भी,
बदल रही है जीवन कि दिशा दशा,
पर जीवित है वो सपने आज अभी.

सपनो से भरि ये दुनिया है,
पूरे होते क्या स्वप्न कभी,
क्या इसलिये नहि वो सपने है,
क्योकि जीवित है आज अभी.

सपने पागल, सपने सुन्दर,
सुन्दर सपनो में सिमटी है याद तेरी,
जीवित है वो सपनो का ताजमहल,
तू ताज मे जिन्दा हर पल हीं.

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