Monday, November 26, 2007

खंडाला

आदमी और प्रकृति का अनुपम सम्बन्ध है, भले ही आप कितना भी विचार-मग्न क्यों ना हो, अगर प्रकृति कि एक सुन्दर मनमोहक छटा दिख जाती है, तो एक पल को मन सोचने लगता है, कि काश..



प्रकृति के है दृष्य अनुपम,
वन गगन से मिल रहे है,
बादलों से भरी धरा देख,
मन के हर तार खिल रहे है.

बड़े पत्थर झार ऊंचे,
झड़ने हर तरफ़ झर रहे है,
मनोहारि ये दृष्य सारे,
मन को बिचलित कर रहे है.

रिमझिम फुहारों के बीच सुंदर,
कैसे ये पर्वत खडे है,
और बादल भींचे उनको,
जैसे बर्षों बिछुड़े मिले है.

गगन से धरा कि,
मिलन कि यह घड़ी है,
और ये सपनों कि घाटी,
साक्ष्य मे उनके खड़ी है.

सौंदर्य कि है छटा अनुपम,
शीतल करती मन कि ज्वाला,
शब्दों से ये परि घाटी,
सुर स्वप्न-लोक यह खंडाला.

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