अंग्रेजी गाने सुना जा रह था,
मन मे सपने बुना जा रहा था,
बैठा एक रिक्शे में अन्धेरि रात को,
घर कि तरफ़ बढा जा रहा था,
सॉफ़्टवेयर इन्जिनियर कि जिन्दगी हीं कुछ ऐसी है,
क्या बताऊ, रोटी का सवाल है.
रिक्शा आगे बढा जा रह था,
अचानक एक झटका सा लगा, सोते से मै जगा,
चुटकि का आवाज, कुछ पहचाना पहचाना सा लगा,
देखा एक युवा, ड्राइवर को कुछ समझा रहा था,
और ड्राइवर गिड़्गिड़ा रहा था,
नहीं है दादा, सच कहता हूँ, आज खस्ता-हाल है,
झगड़ा आगे बढा जा रहा था,
मै चुप-चाप सुना जा रहा था,
फिर एक पिस्टल आ गया युवा के हाथ मे,
ड्राइवर के सिर से लगा वो बैठ गया उसके साथ मे,
देख धन्धे का टाईम है, सुखे गले का बुरा हाल है,
जो कुछ है देता जा, यदि जीने का ख्याल है.
काँप्ता हाथ, गल्ले मे कुन्जि लगा,
जो कुछ था सब ले युवा कि तरफ़ आगे बढा,
सुखे पीले पत्ते सा चेहरा, आँखों मे लुटने का मलाल था,
युवा कि सुर्ख आँखों मे, कसाई सा भूचाल था,
फिर गाड़ी चला जा रहा था,
मै बैठा छट्पटा रहा था,
पूछा ड्राइवर से भैया ये क्य बुरा हाल है,
उसने कहा क्या बताऊ रोजि का सवाल है.
गाड़ी फिर चला जा रहा था,
मै बैठा पछ्ता रहा था,
वो तो गरीब ड्राइवर है, हम बुद्धिजीवियों का क्या हाल है,
उदय भारत के नौनिहालों, से ही तो देश बेहाल है,
समय बिता जा रहा था, और मै मन को समझा रहा था,
हफ़्ता, चोरी -कत्ल, यहाँ तो रोज का यह हाल है,
बूझ तो जाऊ मगर, घर के चिराग का सवाल है.
मन मे सपने बुना जा रहा था,
बैठा एक रिक्शे में अन्धेरि रात को,
घर कि तरफ़ बढा जा रहा था,
सॉफ़्टवेयर इन्जिनियर कि जिन्दगी हीं कुछ ऐसी है,
क्या बताऊ, रोटी का सवाल है.
रिक्शा आगे बढा जा रह था,
अचानक एक झटका सा लगा, सोते से मै जगा,
चुटकि का आवाज, कुछ पहचाना पहचाना सा लगा,
देखा एक युवा, ड्राइवर को कुछ समझा रहा था,
और ड्राइवर गिड़्गिड़ा रहा था,
नहीं है दादा, सच कहता हूँ, आज खस्ता-हाल है,
झगड़ा आगे बढा जा रहा था,
मै चुप-चाप सुना जा रहा था,
फिर एक पिस्टल आ गया युवा के हाथ मे,
ड्राइवर के सिर से लगा वो बैठ गया उसके साथ मे,
देख धन्धे का टाईम है, सुखे गले का बुरा हाल है,
जो कुछ है देता जा, यदि जीने का ख्याल है.
काँप्ता हाथ, गल्ले मे कुन्जि लगा,
जो कुछ था सब ले युवा कि तरफ़ आगे बढा,
सुखे पीले पत्ते सा चेहरा, आँखों मे लुटने का मलाल था,
युवा कि सुर्ख आँखों मे, कसाई सा भूचाल था,
फिर गाड़ी चला जा रहा था,
मै बैठा छट्पटा रहा था,
पूछा ड्राइवर से भैया ये क्य बुरा हाल है,
उसने कहा क्या बताऊ रोजि का सवाल है.
गाड़ी फिर चला जा रहा था,
मै बैठा पछ्ता रहा था,
वो तो गरीब ड्राइवर है, हम बुद्धिजीवियों का क्या हाल है,
उदय भारत के नौनिहालों, से ही तो देश बेहाल है,
समय बिता जा रहा था, और मै मन को समझा रहा था,
हफ़्ता, चोरी -कत्ल, यहाँ तो रोज का यह हाल है,
बूझ तो जाऊ मगर, घर के चिराग का सवाल है.

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