शब्द सारे सिमट रहे है, दृग दरश को तरस रहे है,तल्ख तिरष्कृत तड़प रह मैं, भीड़ मे भी भटक रहा मै,
शांत हूं गुमसुम पड़ा हूं, अस्त अकिंचन अधमरा हूं,
कही ना हो जाए धड़कने गुम, कब तक रहोगी मौन यो तुम.
देखो दिशाएं बोलती है, राज दिल के खोलती है,
पवन भी जब प्रेम पाता, कितने विरह के गीत गाता,
सरिता सरगम घोलती है, कल कल कर किल्लोलती है,
एक तुम हो कि बस गुम, कब तक रहोगी मौन यो तुम.
झींगुड़ो के गान देखो, शब्द के है प्राण देखो,
शब्द जो भावुक बड़े है, शब्द जिन में अमृत जड़े है,
मत उन्हे तुम आजमाओ, दर्द दिल मे मत दबाओ,
रहो ना अब यों तल्ख गुम्सुम, कब तक रहोगी मौन यो तुम.
देखो सागर लहर वाले, लवण वाले भोले भले,
वो भी तट को चुमते है, खुब खुशी से झुमते है,
कर समर्पित ज्वार भाटा, मन ही मन सन्तोष पाता,
फिर तुम्हारा ह्रदय चन्दन, कब तक रहोगी मौन यो तुम.
देखो धीरज डोलता है, मन मेरा सब बोलता है,
परीक्षा कि घड़ी है ये, मगर बहुत बड़ी है ये,
क्षण लगता बरष का सा, तू मुझ पर तरष अब खा,
सुन पथिक का विरह क्रंदन, कब तक रहोगी मौन यो तुम.
दिल कहाँ मेरा बड़ा है, राम सा यह नही कड़ा है,
फिर सीता को बनवास क्यों दूं, जगत का उपहास भले लूं,
बुद्ध सा नही विरक्त हूं मैं, सरल स्नेहाशक्त हूं मैं,
छोड़ो अब ये मौन स्पंदन, कब तक रहोगी मौन यो तुम.
देखो मै सब जानता हूं, बात सारे मानता हूं,
दोष दीपक का ना होता, भंवड़ा खुद ही प्राण खोता,
जिंदगी के इस भंवर में, स्व नही तो शब्द तो दो,
तुम नही मुझ सी अकिंचन, कब तक रहोगी मौन यो तुम.
मौन करुणा जानता हूं, पर अधिक कहाँ माँगता हूं,
जो निहित है नेह मेरे, विधि हाथो स्नेह तेरे,
जिसे कि तुम सब पर लुटाती, फिर मुझे क्यों भुल जाती,
कर रहा फिर से निवेदन, कब तक रहोगी मौन यो तुम.
मासूम है अत्याचार तेरा, सुन्दर ये प्रतिकार मेरा,
ये सजा लम्बी बड़ी है, माँग मेरी भी यह आखिरी है,
भविष्य का ना आस खो दूं, और जग का विश्वास खो दूं,
पर रहे है शब्द अब कब, छोड़ दो ना मौन ये तुम,
मत रहो ना मौन यो तुम, तोड़ दो ना मौन अब तुम.

2 comments:
Kissi ke prati apne prem ko pratak karne ke liye isse uttam aur saral shabad milna kathin hoga. Bahut hi sahi kavita hai
waoooooowwwwwwwwwww........
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