कांटो भरि विदीर्न काया है, हर तरफ़ घना निर्गम छाया है,
पन्थ नही मिलते तो क्या है,
एक राह मन के अंदर है,
जिस पर नही सन्देह तनिक है,
एक बार फिर से लौटेगा, वह जो हारा हुआ पथिक है.
रात घनी निर्मम सूनी है,
कोहड़ो भरि सघन दूनी है,
हाथ नही दिखते तो क्या है,
एक सूर्य मन के अन्दर है,
जिससे वह पाता प्रकाश क्षणिक है,
एक बार फिर से लौटेगा, वह जो हारा हुआ पथिक है.
साथ सभी ने छोड़ दिया है,
अपनो ने मुँह मोर लिया है,
प्रेम नही मिलता तो क्या है,
एक श्रोत मन के अन्दर है,
जिससे पाता स्नेह पथिक है,
एक बार फिर से लौटेगा, वह जो हारा हुआ पथिक है.
घायल हुआ है फूलों से तो क्या,
टकरा ना सका धूलों से तो क्या,
सुना लगे ये जीवन तो क्या है,
कुछ यादे मन के अन्दर है,
जिस से मिलता सन्तोष सरित् है,
एक बार फिर से लौटेगा, वह जो हारा हुआ पथिक है.
शब्द नही मिलते तो क्या है,
भाव नही खिलते तो क्या है,
सरल ह्रिदय टूटा तो क्या है,
एक सत्य मन के अन्दर है,
जो देता आधार निमित्त है,
एक बार फिर से लौटेगा,वह जो हारा हुआ पथिक है.


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