Tuesday, November 27, 2007

एक अपना खो रहा हूँ, दूसरे को पा रहा हूँ...

आज यहाँ खुशी है, गम भी है,
आज मन हँस रहा, आँखे नम भी है,
आज मैने कुछ खोया कुछ पाया भी है,
आज जी भर हँसा, और रोया भी है.

आज मन मे यादें पुरानी, और आँखो मे भविष्य का सपना भी है,
धुऐं का साथ है छुटा, पर काली घटाओं मे एक बादल अपना भी है,
सिर से हट गई है हाथें, हाथों ने हाथ को थामा है,
धूप है आज खिला निख्रड़ा, और धुऐं का कोहड़ा घना है.

आज डूबा है सूरज, पर आज ही चाँद भी उग आया है,
आज घना है जब मन, जीवन ने रंग अपना बिखराया है,
आज थका हूँ जब मै, किसी ने नींद मेरी लूटी है,
आज जब है मदिर आँखे, स्वपन मेरी टूटी है.

आज जब मै हूँ दुखी, तो खुशी मेरी है,
हिम का छूटा है साथ, तो आज सरित मेरी है,
यादें मन मे घुमड़ रही, संक्रमण की ये घड़ी है,
नजरों से खुश हूँ मै, मगर मन मे पीड़ा ये बड़ी है,
किसी से छूटा है साथ, किसी ने अन्जाने चैन लूटा है,
किसी से जुड़ा है रिश्ता, कही यादों का सिलसिला टूटा है.
एक अपना खो रहा हूँ, दूसरे को पा रहा हूँ.

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