अगले बरष जब यही दिन आ रहा होगा,
मै यादो कि थाति सजा कर रखूँगा,
सपनो का घरौंदा बसा कर रखूँगा,
दीप आशा का झिलमिल जला कर रखूँगा,
चांद तारों से आंगन सजा कर रखूँगा,
नूर नजरों कि दिल मे जला कर रखूँगा,
इंतजार मे ये पलकें बिछा कर रखूँगा,
दुनिया कि सारी खुशियां छुपा कर रखूँगा,
मादक खुशबु से आंगन महका के रखूँगा,
भींगी पलकों से नजरे बचा कर रखूँगा,
अगले बरष जब यही दिन आ रहा होगा.
अगले बरष जब यही दिन आ रहा होगा,
तुम दुनिया से नजरे बचा कर ना आना,
मुझसे नजरे मिलाना शर्मा कर ना आना,
दाम दामन का दिल मे छुपा कर ना आना,
प्रीत के बोल मन मे दबा कर ना आना,
डोर आशा कि कोइ तुड़ा कर ना आना,
भींगी हो यदि पलके, सुखा कर ना आना,
याद आये मेरी ना फिर इस चौखट ना आना,
अगर राह रोके जमाना, झूठ कह कर ना आना,
यदि दामन पर लगे हो काँटे, छुड़ा कर ना आना,
अगले बरष जब यही दिन आ रहा होगा.
अगले बरष जब यही दिन आ रहा होगा,
बस भोलि सी सुरत समेटे हुए आना,
बस स्नेह कि मुरत लपेटे हुए आना,
नीले नयनो मे आशा के काजल ओढे आना,
सुर्ख ओठों पे यादों के बादल ओढे आना,
मैं खड़ा राह मे तेरी राह देखूंगा,
तुम आओगी इस बार, हर बार ये सोचूंगा,
अगले बरष जब यही दिन आ रहा होगा.
Friday, May 23, 2008
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